UGC ने छात्रों की सुरक्षा और पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन और ऑफलाइन कक्षाओं के नियम बनाए। कोविड के दौरान, UGC ने समय-समय पर परीक्षाओं और डिग्री जारी करने के लिए दिशानिर्देश दिए। उन्होंने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि छात्रों की शिक्षा प्रभावित न हो। शुरुआत में, UGC ने कई विश्वविद्यालयों को परीक्षाओं को ऑनलाइन या ऑफलाइन कराने का विकल्प दिया। लेकिन कुछ नियम छात्रों और कॉलेजों के लिए विवादास्पद साबित हुए।
कुछ छात्रों और संस्थानों ने UGC के आदेशों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। उनका कहना था कि कुछ आदेश शिक्षण और परीक्षा के अधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं। कोर्ट ने इस मामले में दोनों पक्षों की सुनवाई की और पाया कि UGC के आदेशों में कुछ अस्पष्टता और समस्याएं हैं। कोर्ट ने छात्रों और संस्थानों की सुरक्षा और हित को ध्यान में रखते हुए, निर्णय के लिए विस्तृत विचार करने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम फैसला सुनाया और कहा कि UGC के कुछ आदेश छात्रों के अधिकारों का उल्लंघन कर सकते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आदेशों को बिना छात्रों की सहमति या उचित प्रक्रिया के लागू नहीं किया जा सकता। इस फैसले के बाद, कई आदेश रद्द कर दिए गए और UGC को नए दिशा-निर्देश बनाने का निर्देश दिया गया। इससे छात्रों को न्याय मिला और शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ी।