इस मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। कहा जाता है कि इसका निर्माण द्वापर काल में हुआ था । यह मंदिर एक ही पत्थर को तराशकर बनाया गया था। 1956 में प्रकाशित ब्रिटिश गजट में इस मंदिर का उल्लेख नेपाल के पशुपतिनाथ और भारत के हरिहर क्षेत्र के बीच किया गया था।
महाशिवरात्रि व्रत कथा चित्रभानु नामक एक भील शिकारी की कथा है जिसने अनजाने में ही शिवरात्रि का व्रत कर लिया। रात भर जगते हुए चित्रभानु ने अनजाने में ही महाशिवरात्रि पर शिवजी के ऊपर बेल के पत्ते अर्पित किए जिसके पुण्य से वह शिवलोक में स्थान पा गया।
बिजली महादेव पर बिजली गिरने का मुख्य कारण पौराणिक कथाओं और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव द्वारा धरती पर आने वाले संकटों को खुद पर लेना है; एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक दैत्य को मारकर इंद्र देव को हर 12 साल में उस स्थान पर बिजली गिराने का आदेश दिया था, जिससे महादेव धरती के संकट हर लेते हैं और शिवलिंग टूटकर मक्खन से जुड़ जाता है, जो नवीनीकरण और सुरक्षा का प्रतीक है.